रस के कितने भेद होते हैं? स्थायी भाव सहित पूरी सूच | Mytestseries

Hindi Grammar • Government Exam Notes • MCQ Practice

रस के कितने भेद होते हैं? स्थायी भाव सहित पूरी सूची

रस हिंदी साहित्य और काव्यशास्त्र का एक महत्वपूर्ण परीक्षा-विषय है। इस नोट्स में रस की परिभाषा, रस निष्पत्ति, स्थायी भाव, 9 प्रमुख रसों की मानक सूची तथा वात्सल्य और भक्ति जैसे बाद में प्रचलित रसों को सरल उदाहरणों के साथ समझाया गया है। SSC, शिक्षक भर्ती, TET, राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सरकारी परीक्षाओं के लिए यह एक त्वरित रिविजन नोट्स है।

🎓 फ्री टेस्ट के लिए रजिस्टर करें 📝 आज का Free Test
📌 परीक्षा फोकसरस + स्थायी भाव + पहचान + उदाहरण
🧠 Quick Revisionएक ही तालिका में सभी प्रमुख रस
📝 PracticeDaily Free Test + MCQ अभ्यास

रस किसे कहते हैं?

काव्य, नाटक या साहित्यिक रचना को पढ़ते, सुनते या देखते समय पाठक अथवा सहृदय के मन में किसी स्थायी भाव का परिपक्व और आस्वाद्य रूप में अनुभव होना रस कहलाता है। सरल शब्दों में, रचना को पढ़कर हमारे मन में जो विशिष्ट भावानुभूति उत्पन्न होती है और जिसका हम आनंद लेते हैं, वही रस है।

परीक्षा में याद रखें: स्थायी भाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी/व्यभिचारी भावों के संयोग से आस्वाद योग्य अवस्था में पहुँचता है, तब रस की निष्पत्ति मानी जाती है।

रस की निष्पत्ति कैसे होती है?

भरतमुनि के प्रसिद्ध सूत्र “विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः” के अनुसार स्थायी भाव की रस रूप में अभिव्यक्ति विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव के संयोग से होती है। प्रतियोगी परीक्षा के लिए इसे चार मुख्य तत्वों से याद करें:

अंगसरल अर्थपहचान
विभावभाव को जाग्रत करने वाला कारणआलंबन + उद्दीपन
अनुभावजाग्रत भाव की बाहरी अभिव्यक्तिहाव-भाव, वाणी, चेष्टा आदि
स्थायी भावमन में स्थिर रहने वाला मूल भावजैसे रति, शोक, उत्साह
व्यभिचारी/संचारी भावसहायक और अस्थायी भावजो स्थायी भाव को पुष्ट करते हैं

रस के कितने भेद होते हैं?

यह प्रश्न परीक्षा में थोड़ा भ्रम पैदा कर सकता है, क्योंकि रसों की संख्या परंपरा और आचार्य के अनुसार अलग-अलग बताई जाती है। भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में 8 रसों का उल्लेख मिलता है। बाद में शांत रस को जोड़कर 9 रसों की परंपरा मजबूत हुई। आगे की काव्यशास्त्रीय परंपरा में वात्सल्य और भक्ति को भी स्वतंत्र रस के रूप में पढ़ाया जाता है। इसलिए सामान्य प्रतियोगी परीक्षा नोट्स में 9 प्रमुख रस और विस्तृत सूची में 10/11 रस मिल सकते हैं।

Exam Tip: यदि प्रश्न “भरतमुनि के अनुसार” हो, तो 8 रस याद रखें। यदि सामान्य हिंदी व्याकरण में “नौ रस” पूछा जाए, तो 9 रसों की सूची में शांत रस शामिल करें। यदि पाठ्यक्रम/पुस्तक वात्सल्य या भक्ति को अलग रस मानती है, तो उस परंपरा के अनुसार उत्तर दें।

रस एवं उनके स्थायी भाव — पूरी तालिका

क्र.रसस्थायी भावसरल पहचानप्रमुख उदाहरण/स्थिति
1शृंगार रसरतिप्रेम, आकर्षणनायक-नायिका का प्रेम
2हास्य रसहासहँसी, विनोदहास्यास्पद व्यवहार
3करुण रसशोकदुःख, वियोगवियोग या मृत्यु का प्रसंग
4रौद्र रसक्रोधउग्रता, रोषअन्याय पर प्रचंड क्रोध
5वीर रसउत्साहसाहस, पराक्रमयुद्ध या कठिन कार्य का साहस
6भयानक रसभयडर, आतंकअंधकार/भयावह घटना
7बीभत्स रसजुगुप्साघृणाघृणित या विकृत दृश्य
8अद्भुत रसविस्मयआश्चर्य, कौतूहलअसाधारण दृश्य/घटना
9शांत रसनिर्वेद/शमवैराग्य, शांतिसांसारिक मोह से विरक्ति
10वात्सल्य रसवत्सलता/स्नेहमाता-पिता का संतान प्रेममाँ का बच्चे के प्रति स्नेह
11भक्ति रसभगवद्-विषयक रतिईश्वर के प्रति प्रेम/अनुरागईश्वर-भक्ति और समर्पण

नोट: 10वाँ और 11वाँ रस सभी आचार्यों/परीक्षा पुस्तकों में समान रूप से स्वतंत्र रस नहीं माने जाते। प्रश्न में दिए गए आचार्य या पाठ्यक्रम की परंपरा को प्राथमिकता दें।

प्रमुख रसों की पहचान — आसान भाषा में

1. शृंगार रस — स्थायी भाव: रति

जब प्रेम, आकर्षण, अनुराग या सौंदर्य-बोध से रति का भाव परिपक्व होता है, वहाँ शृंगार रस माना जाता है। इसके दो सामान्य रूप संयोग और वियोग के रूप में पढ़े जाते हैं।

पहचान ट्रिक: प्रेम/मिलन/विरह → शृंगार → रति।

2. हास्य रस — स्थायी भाव: हास

किसी व्यक्ति, व्यवहार, वेशभूषा या परिस्थिति से हँसी और विनोद का भाव उत्पन्न हो तो हास्य रस होता है।

पहचान ट्रिक: हँसी/मजाक/विनोद → हास्य → हास।

3. करुण रस — स्थायी भाव: शोक

दुःख, वियोग, मृत्यु, असहायता या विपत्ति के मार्मिक चित्रण से उत्पन्न भाव करुण रस की पहचान है।

पहचान ट्रिक: दुःख/वियोग → करुण → शोक।

4. रौद्र रस — स्थायी भाव: क्रोध

अन्याय, अपमान या अत्याचार के कारण उत्पन्न तीव्र क्रोध और उग्रता रौद्र रस का आधार है।

पहचान ट्रिक: गुस्सा/रोष/उग्रता → रौद्र → क्रोध।

5. वीर रस — स्थायी भाव: उत्साह

साहस, पराक्रम, कर्तव्य-पालन और कठिन परिस्थिति में आगे बढ़ने की भावना से वीर रस की अनुभूति होती है।

पहचान ट्रिक: साहस/पराक्रम → वीर → उत्साह।

6. भयानक रस — स्थायी भाव: भय

भयावह वातावरण, संकट, अंधकार या डरावनी घटना से भय का भाव जागता है और भयानक रस की निष्पत्ति होती है।

पहचान ट्रिक: डर/आतंक → भयानक → भय।

7. बीभत्स रस — स्थायी भाव: जुगुप्सा

घृणा, अरुचि या विकर्षण उत्पन्न करने वाले दृश्य और वर्णन बीभत्स रस का आधार बनते हैं।

पहचान ट्रिक: घृणा → बीभत्स → जुगुप्सा।

8. अद्भुत रस — स्थायी भाव: विस्मय

असाधारण, आश्चर्यजनक या चमत्कारिक घटना देखकर मन में उत्पन्न विस्मय अद्भुत रस की पहचान है।

पहचान ट्रिक: आश्चर्य → अद्भुत → विस्मय।

9. शांत रस — स्थायी भाव: निर्वेद/शम

सांसारिक मोह, लोभ और आसक्ति से विरक्ति तथा मन की शांति शांत रस से जुड़ी मानी जाती है। विभिन्न ग्रंथों में इसके स्थायी भाव के लिए निर्वेद या शम जैसे शब्द मिलते हैं।

पहचान ट्रिक: वैराग्य/आंतरिक शांति → शांत → निर्वेद/शम।

10. वात्सल्य रस — स्थायी भाव: वत्सलता/स्नेह

माता-पिता या बड़े व्यक्ति का बच्चे के प्रति स्वाभाविक स्नेह, ममता और संरक्षण की भावना वात्सल्य रस से संबंधित है।

पहचान ट्रिक: संतान के प्रति ममता → वात्सल्य।

11. भक्ति रस — स्थायी भाव: भगवद्-विषयक रति

ईश्वर के प्रति प्रेम, श्रद्धा, अनुराग और समर्पण को भक्ति रस के रूप में समझाया जाता है। यह वर्गीकरण काव्यशास्त्र की बाद की परंपराओं में विशेष रूप से मिलता है।

पहचान ट्रिक: ईश्वर के प्रति प्रेम → भक्ति → भगवद्-विषयक रति।

रस याद करने की आसान ट्रिक

रति – हास – शोक – क्रोध – उत्साह – भय – जुगुप्सा – विस्मय – निर्वेद
इसे क्रम से बोलकर याद करें: शृंगार → हास्य → करुण → रौद्र → वीर → भयानक → बीभत्स → अद्भुत → शांत।
स्थायी भावरस
रतिशृंगार
हासहास्य
शोककरुण
क्रोधरौद्र
उत्साहवीर
भयभयानक
जुगुप्साबीभत्स
विस्मयअद्भुत
निर्वेद/शमशांत

Daily Free Test — तारीख अनुसार

यह तालिका रोज़ अपडेट की जा सकती है। नया टेस्ट प्रकाशित होने पर नई तारीख की row सबसे ऊपर जोड़ें। जब किसी टेस्ट का अलग URL बन जाए, उसी row के “टेस्ट दें” लिंक को उस वास्तविक URL से बदलें।

दिनांकटेस्टविषयप्रश्नस्थिति
25-09-2026रस — Daily Free MCQहिंदी व्याकरण10Live

आज का Free MCQ Test — रस

1. शृंगार रस का स्थायी भाव क्या है?
A. हास   B. रति   C. शोक   D. उत्साह
उत्तर: B. रति
2. करुण रस का स्थायी भाव है—
A. शोक   B. भय   C. क्रोध   D. विस्मय
उत्तर: A. शोक
3. वीर रस का स्थायी भाव क्या है?
A. रति   B. उत्साह   C. जुगुप्सा   D. हास
उत्तर: B. उत्साह
4. रौद्र रस का स्थायी भाव है—
A. क्रोध   B. भय   C. शोक   D. निर्वेद
उत्तर: A. क्रोध
5. बीभत्स रस का स्थायी भाव कौन-सा है?
A. विस्मय   B. जुगुप्सा   C. रति   D. उत्साह
उत्तर: B. जुगुप्सा
6. अद्भुत रस का स्थायी भाव है—
A. हास   B. भय   C. विस्मय   D. शोक
उत्तर: C. विस्मय
7. भयानक रस किस स्थायी भाव से संबंधित है?
A. भय   B. क्रोध   C. रति   D. निर्वेद
उत्तर: A. भय
8. शांत रस का स्थायी भाव सामान्यतः किसे माना जाता है?
A. हास   B. निर्वेद/शम   C. रति   D. जुगुप्सा
उत्तर: B. निर्वेद/शम
9. रस की निष्पत्ति किसके संयोग से मानी जाती है?
A. केवल स्थायी भाव से   B. विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव से स्थायी भाव की पुष्टि द्वारा   C. केवल अलंकार से   D. केवल छंद से
उत्तर: B
10. भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में मूल रूप से कितने रसों का उल्लेख मिलता है?
A. 8   B. 9   C. 10   D. 11
उत्तर: A. 8

आधिकारिक एवं विश्वसनीय संदर्भ

काव्यशास्त्र के ऐतिहासिक संदर्भ और रस-सिद्धांत को समझने के लिए शैक्षणिक स्रोतों को प्राथमिकता दें। परीक्षा में उत्तर लिखते समय प्रश्न में दिए गए आचार्य/ग्रंथ की परंपरा को ध्यान में रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न — FAQ

रस के कितने भेद होते हैं?

भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में 8 रसों का उल्लेख मिलता है। बाद की परंपरा में शांत रस जुड़ने से 9 रस माने गए। कुछ काव्यशास्त्रीय परंपराओं में वात्सल्य और भक्ति को भी स्वतंत्र रस के रूप में पढ़ाया जाता है।

शृंगार रस का स्थायी भाव क्या है?

शृंगार रस का स्थायी भाव रति है।

वीर रस का स्थायी भाव क्या है?

वीर रस का स्थायी भाव उत्साह है।

करुण रस का स्थायी भाव क्या है?

करुण रस का स्थायी भाव शोक है।

रौद्र रस का स्थायी भाव क्या है?

रौद्र रस का स्थायी भाव क्रोध है।

शांत रस का स्थायी भाव क्या है?

शांत रस का स्थायी भाव सामान्यतः निर्वेद या शम बताया जाता है; अलग-अलग ग्रंथों में शब्द-प्रयोग में अंतर मिल सकता है।

भयानक और बीभत्स रस में क्या अंतर है?

भयानक रस में मुख्य भाव भय है, जबकि बीभत्स रस में मुख्य भाव जुगुप्सा अर्थात घृणा है।

Editorial Note: यह पेज प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा-केंद्रित अध्ययन सामग्री के रूप में तैयार किया गया है। रसों की संख्या और कुछ स्थायी भावों के नाम में आचार्य/ग्रंथ के अनुसार मतभेद मिल सकते हैं। किसी विशेष परीक्षा के प्रश्न में दिए गए संदर्भ को प्राथमिकता दें।

Get Daily Free Questions

Practice Faster. Score Higher.

Download Our App

Practice Faster. Score Higher. Install the App Now.

Categories

Test Series

Recent Comments