छंद किसे कहते हैं? मात्रिक और वर्णिक छंद में अंतर
1. छंद की परिभाषा व मूल तत्व
परिभाषा: जिस रचना में वर्णों या मात्राओं की एक निश्चित संख्या, क्रम, यति (विराम) और गति का नियमपूर्वक पालन किया जाता है, उसे छंद कहते हैं।
छंद के मुख्य तत्व इस प्रकार हैं:
- चरण/पद: छंद की एक पंक्ति को चरण कहते हैं। अधिकतर छंदों में चार चरण होते हैं।
- मात्रा: किसी वर्ण के उच्चारण में लगने वाला समय। ह्रस्व (छोटे) स्वर वाले वर्ण की 1 मात्रा (लघु) और दीर्घ (बड़े) स्वर वाले वर्ण की 2 मात्राएँ (गुरु) मानी जाती हैं।
- वर्ण: छंद में प्रयुक्त कुल अक्षरों की संख्या।
- यति: चरण के बीच में आने वाला विराम या ठहराव।
- तुक: चरणों के अंत में समान ध्वनि की पुनरावृत्ति (तुकबंदी)।
गणना के आधार पर छंद के दो मुख्य भेद हैं — मात्रिक छंद और वर्णिक छंद।
2. मात्रिक छंद — परिभाषा व प्रमुख उदाहरण
परिभाषा: जिस छंद की रचना मात्राओं की गिनती के आधार पर होती है (वर्णों की संख्या के आधार पर नहीं), उसे मात्रिक छंद कहते हैं। इसमें लघु-गुरु वर्णों का क्रम बंधा हुआ नहीं होता, सिर्फ कुल मात्रा-योग निश्चित रहता है।
| छंद | संरचना (मात्राएँ) |
|---|---|
| दोहा | 4 चरण — विषम चरण (1,3) में 13-13 मात्राएँ, सम चरण (2,4) में 11-11 मात्राएँ |
| चौपाई | 4 चरण — प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ |
| सोरठा | दोहे का उल्टा क्रम — विषम चरण में 11-11, सम चरण में 13-13 मात्राएँ |
| रोला | 4 चरण — प्रत्येक चरण में 24-24 मात्राएँ (11+13 यति सहित) |
3. वर्णिक छंद — परिभाषा व प्रमुख उदाहरण
परिभाषा: जिस छंद की रचना वर्णों (अक्षरों) की निश्चित संख्या के साथ-साथ लघु-गुरु का क्रम भी निश्चित होकर होती है, उसे वर्णिक छंद कहते हैं। यह मात्रिक छंद से अधिक नियमबद्ध होता है।
| छंद | संरचना (वर्ण) |
|---|---|
| कवित्त (मनहर) | 4 चरण — प्रत्येक में 31 वर्ण (8+8+8+7 यति सहित) |
| सवैया | 4 चरण — वर्णों की संख्या व लघु-गुरु क्रम प्रकार अनुसार निश्चित (सामान्यतः 22-26 वर्ण प्रति चरण) |
| इंद्रवज्रा | 4 चरण — प्रत्येक में 11 वर्ण, विशेष लघु-गुरु क्रम के साथ |
4. मात्रिक बनाम वर्णिक छंद — अंतर की ट्रिक
| आधार | मात्रिक छंद | वर्णिक छंद |
|---|---|---|
| गणना का आधार | मात्राओं की संख्या | वर्णों की संख्या + लघु-गुरु क्रम |
| लघु-गुरु क्रम | निश्चित नहीं (स्वतंत्र) | पूर्णतः निश्चित |
| उदाहरण | दोहा, चौपाई, सोरठा, रोला | कवित्त, सवैया, इंद्रवज्रा |
5. मुक्त छंद — संक्षिप्त परिचय
आधुनिक हिंदी कविता में एक तीसरी श्रेणी भी प्रचलित है — मुक्त छंद (Free Verse)। इसमें मात्रा, वर्ण, यति या तुक का कोई बंधा हुआ नियम नहीं होता; कवि भाव के अनुसार पंक्तियाँ स्वतंत्र रूप से लिखता है। छायावादी व आधुनिक कवियों (जैसे सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') की कई रचनाएँ मुक्त छंद में हैं।
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7. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. छंद किसे कहते हैं?
जिस रचना में वर्णों या मात्राओं की एक निश्चित संख्या, क्रम, यति और गति का नियमपूर्वक पालन किया जाता है, उसे छंद कहते हैं।
Q2. मात्रिक छंद किसे कहते हैं?
जिस छंद में मात्राओं की गिनती के आधार पर रचना की जाती है, उसे मात्रिक छंद कहते हैं। जैसे दोहा, चौपाई, सोरठा, रोला।
Q3. वर्णिक छंद किसे कहते हैं?
जिस छंद में वर्णों की संख्या के साथ-साथ लघु-गुरु का क्रम भी निश्चित होता है, उसे वर्णिक छंद कहते हैं। जैसे कवित्त, सवैया, इंद्रवज्रा।
Q4. मात्रिक और वर्णिक छंद में मुख्य अंतर क्या है?
मात्रिक छंद में सिर्फ कुल मात्राओं की संख्या निश्चित होती है, जबकि वर्णिक छंद में वर्णों की संख्या के साथ-साथ लघु-गुरु का क्रम भी बिल्कुल निश्चित होता है।
Q5. दोहा छंद की क्या पहचान है?
दोहा एक मात्रिक छंद है, जिसमें चार चरण होते हैं — विषम चरणों में 13-13 मात्राएँ और सम चरणों में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
Q6. सरकारी परीक्षाओं में छंद से कितने प्रश्न पूछे जाते हैं?
SSC, BPSC TRE, राज्य PCS और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के हिंदी विषय में छंद से जुड़े प्रश्न औसतन 2 से 4 प्रश्न प्रति परीक्षा पूछे जाते हैं।


