समास के भेद: तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, बहुव्रीहि में अंतर — पूरी नोट्स

समास के भेद: तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, बहुव्रीहि में अंतर कैसे करें? (पूरी नोट्स)

✍️ MyTestSeries संपादकीय टीम  |  🔄 अपडेटेड: सितंबर 2026  |  ⏱️ पढ़ने का समय: 14 मिनट

🎯 एक नज़र में (TL;DR): तत्पुरुष समास में दोनों पदों के बीच कारकीय (विभक्ति) संबंध होता है — जैसे "राजपुत्र" (राजा का पुत्र)। कर्मधारय में पूर्वपद विशेषण व उत्तरपद विशेष्य होता है — जैसे "नीलकमल" (नीला कमल)। द्विगु में पूर्वपद संख्यावाचक होता है और समूह का बोध होता है — जैसे "नवरात्रि" (नौ रात्रियों का समूह)। बहुव्रीहि में कोई पद प्रधान नहीं होता, पूरा शब्द किसी तीसरे व्यक्ति की ओर संकेत करता है — जैसे "दशानन" (रावण)।
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1. समास का परिचय व परिभाषा

परिभाषा: जब दो या दो से अधिक शब्द आपस में मिलकर एक नया सार्थक शब्द बनाते हैं और बीच का कारक-चिह्न (विभक्ति) लुप्त हो जाता है, तो इस प्रक्रिया को समास कहते हैं। जैसे "राजा का पुत्र" से "राजपुत्र" बनना।

समास से बने शब्द को समस्त पद कहते हैं, और समस्त पद को विभक्ति सहित पुनः अलग-अलग करने की प्रक्रिया को समास-विग्रह कहते हैं। जैसे "राजपुत्र" का समास-विग्रह है — "राजा का पुत्र"।

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2. समास के छह भेद — एक नज़र में

समासप्रधान पदउदाहरण
अव्ययीभाव समासपूर्वपद प्रधान (अव्यय)यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार)
तत्पुरुष समासउत्तरपद प्रधानराजपुत्र (राजा का पुत्र)
कर्मधारय समासउत्तरपद प्रधान (विशेषण-विशेष्य)नीलकमल (नीला कमल)
द्विगु समासउत्तरपद प्रधान (समूह बोध)नवरात्रि (नौ रात्रियों का समूह)
बहुव्रीहि समासकोई पद प्रधान नहीं (अन्य पद प्रधान)दशानन (रावण)
द्वंद्व समासदोनों पद प्रधानमाता-पिता (माता और पिता)

इस पेज में हम मुख्य रूप से चार सबसे ज़्यादा भ्रम पैदा करने वाले भेदों — तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु और बहुव्रीहि — के बीच का अंतर विस्तार से समझेंगे, क्योंकि परीक्षाओं में इन्हीं में सबसे ज़्यादा उलझन होती है।

3. तत्पुरुष समास — विस्तार व उप-भेद

जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच कोई कारक-चिह्न (विभक्ति) छिपा होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। कारक के अनुसार तत्पुरुष के छह उप-भेद होते हैं:

उप-भेदविभक्ति चिह्नउदाहरण
कर्म तत्पुरुषकोगिरहकट (गिरह को काटने वाला)
करण तत्पुरुषसे/द्वारामनचाहा (मन से चाहा हुआ)
संप्रदान तत्पुरुषके लिएरसोईघर (रसोई के लिए घर)
अपादान तत्पुरुषसे (अलगाव)देशनिकाला (देश से निकाला)
संबंध तत्पुरुषका/के/कीराजपुत्र (राजा का पुत्र)
अधिकरण तत्पुरुषमें/परनगरवास (नगर में वास)

4. कर्मधारय समास — विस्तार

जिस समास में पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य हो (या दोनों में उपमान-उपमेय का संबंध हो), उसे कर्मधारय समास कहते हैं। इसमें कोई कारक-चिह्न नहीं जुड़ता, बल्कि "जो...है" लगाकर विग्रह किया जाता है।

उदाहरण: नीलकमल = नीला (है जो) कमल; महात्मा = महान (है जो) आत्मा; चंद्रमुख = चंद्रमा के समान मुख।

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5. तत्पुरुष बनाम कर्मधारय — अंतर की ट्रिक

आधारतत्पुरुष समासकर्मधारय समास
पदों का संबंधकारकीय (विभक्ति) संबंधविशेषण-विशेष्य / उपमान-उपमेय संबंध
विग्रह में क्या जुड़ता हैका, के लिए, से, में, पर आदि"जो है", "के समान" जैसे शब्द
उदाहरणराजपुत्र = राजा का पुत्रनीलकमल = नीला (है जो) कमल
💡 ट्रिक: यदि विग्रह करने पर "का/को/से/में/पर" जैसा कोई कारक चिह्न जुड़े — तो तत्पुरुष; यदि पूर्वपद केवल विशेषता (गुण) बता रहा हो और कोई कारक चिह्न न जुड़े — तो कर्मधारय।
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6. द्विगु समास — विस्तार व अंतर

जिस समास में पूर्वपद संख्यावाचक विशेषण हो और समस्त पद से किसी समूह या समाहार का बोध हो, उसे द्विगु समास कहते हैं।

उदाहरण: नवरात्रि = नौ रात्रियों का समूह; पंचवटी = पाँच वटों (बरगद वृक्षों) का समूह; सप्ताह = सात दिनों का समूह।

💡 द्विगु बनाम कर्मधारय ट्रिक: दोनों में पूर्वपद विशेषण जैसा लगता है, पर द्विगु में पूर्वपद हमेशा संख्यावाचक होता है और अर्थ में "समूह/समाहार" का भाव आता है, जबकि कर्मधारय में पूर्वपद गुणवाचक होता है और यह किसी एक वस्तु विशेष की विशेषता बताता है, समूह की नहीं।

7. बहुव्रीहि समास — विस्तार व अंतर

जिस समास में न तो पूर्वपद प्रधान होता है और न ही उत्तरपद, बल्कि पूरा समस्त पद किसी तीसरे (बाहरी) व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करता है, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

उदाहरण: दशानन = दस हैं आनन (मुख) जिसके अर्थात् रावण; लंबोदर = लंबा है उदर जिसका अर्थात् गणेश; पीतांबर = पीत है अंबर (वस्त्र) जिसका अर्थात् विष्णु/कृष्ण

💡 बहुव्रीहि बनाम कर्मधारय/द्विगु ट्रिक: यदि समस्त पद का अर्थ स्वयं शब्द में मौजूद पदों से नहीं, बल्कि किसी बाहरी तीसरे व्यक्ति/वस्तु से जुड़ता है (जैसे "दशानन" में असली अर्थ "रावण" है, न कि "दस" या "आनन"), तो वह बहुव्रीहि समास है।

8. चारों समासों में अंतर — मास्टर तालिका

समासपहचान का मूल आधारउदाहरण
तत्पुरुषविग्रह में कारक-चिह्न (का/को/से/में) जुड़ेराजपुत्र = राजा का पुत्र
कर्मधारयपूर्वपद गुणवाचक विशेषण, कोई कारक चिह्न नहींनीलकमल = नीला कमल
द्विगुपूर्वपद संख्यावाचक, समूह/समाहार का बोधनवरात्रि = नौ रात्रियों का समूह
बहुव्रीहिअर्थ किसी तीसरे (बाहरी) व्यक्ति/वस्तु की ओर संकेत करेदशानन = रावण

परीक्षा में समास पहचानने का सबसे सुरक्षित तरीका यही है — पहले शब्द का सही विग्रह करें, फिर देखें कि अर्थ किस पद की ओर झुक रहा है (पूर्वपद, उत्तरपद, दोनों, या किसी तीसरे की ओर) — इसी से समास का प्रकार तय होता है।

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दिनांकटेस्ट/नोट्स का नामविषयलिंकस्थिति
11-09-2026 समास के भेद — तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, बहुव्रीहि हिंदी व्याकरण अभी पढ़ें → Live
10-09-2026 कारक व विभक्ति चार्ट — डेली टेस्ट हिंदी व्याकरण फ्री टेस्ट दें → Live
09-09-2026 संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया — डेली टेस्ट हिंदी व्याकरण फ्री टेस्ट दें → Live
08-09-2026 सिंधु घाटी सभ्यता — डेली टेस्ट प्राचीन भारतीय इतिहास फ्री टेस्ट दें → Live

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10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. समास किसे कहते हैं?

दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बनने वाले एक नए सार्थक शब्द को समास कहते हैं, जिसमें बीच के कारक-चिह्न (विभक्ति) का लोप हो जाता है।

Q2. तत्पुरुष और कर्मधारय समास में मुख्य अंतर क्या है?

तत्पुरुष समास में दोनों पदों के बीच कारकीय संबंध होता है जैसे "का, के लिए, से", जबकि कर्मधारय समास में पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है, यहाँ कोई कारक चिह्न नहीं जुड़ता।

Q3. द्विगु समास की क्या पहचान है?

द्विगु समास में पूर्वपद हमेशा संख्यावाचक विशेषण होता है और समस्त पद से किसी समूह या समाहार का बोध होता है, जैसे "नवरात्रि" (नौ रात्रियों का समूह)।

Q4. बहुव्रीहि समास कर्मधारय व द्विगु से किस प्रकार अलग है?

बहुव्रीहि समास में न तो पूर्वपद प्रधान होता है और न ही उत्तरपद, बल्कि पूरा समस्त पद किसी तीसरे (बाहरी) व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करता है, जैसे "दशानन" (रावण)।

Q5. समास के कुल कितने भेद माने जाते हैं?

हिंदी व्याकरण में समास के सामान्यतः छह भेद माने जाते हैं — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, बहुव्रीहि और द्वंद्व समास।

Q6. समास और संधि में क्या अंतर है?

समास में दो शब्दों के बीच का कारक-चिह्न लुप्त होकर एक नया शब्द बनता है, जबकि संधि में दो वर्णों (ध्वनियों) के मेल से उनके स्वरूप में परिवर्तन होता है।

Q7. सरकारी परीक्षाओं में समास से कितने प्रश्न पूछे जाते हैं?

SSC, BPSC TRE, राज्य PCS और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के हिंदी विषय में समास से जुड़े प्रश्न औसतन 2 से 6 प्रश्न प्रति परीक्षा पूछे जाते हैं।

लेखक के बारे में: यह लेख MyTestSeries की संपादकीय टीम द्वारा NCERT हिंदी व्याकरण पाठ्यपुस्तकों और मानक हिंदी व्याकरण संदर्भ ग्रंथों के आधार पर मौलिक रूप से तैयार किया गया है, ताकि SSC, BPSC TRE, राज्य PCS और सभी सरकारी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को सटीक व सरल भाषा में जानकारी मिल सके।

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