कारक कितने प्रकार के होते हैं? विभक्ति सहित पूरा चार्ट (Karak & Vibhakti)
1. कारक का परिचय व परिभाषा
परिभाषा: संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य में प्रयुक्त क्रिया के साथ उसके संबंध का बोध होता है, उसे कारक कहते हैं। सरल शब्दों में — कारक यह बताता है कि वाक्य में कोई शब्द क्रिया से किस प्रकार जुड़ा है (कौन कर रहा है, किसके लिए, किससे, कहाँ आदि)।
कारक को पहचानने वाले चिह्नों (ने, को, से, का आदि) को विभक्ति या कारक-चिह्न कहा जाता है।
2. कारक व विभक्ति का पूरा चार्ट (8 भेद)
| कारक | विभक्ति चिह्न | क्या बताता है | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| कर्ता कारक | ने | क्रिया करने वाला | राम ने खाना खाया |
| कर्म कारक | को | क्रिया का प्रभाव किस पर पड़े | मोहन ने राम को बुलाया |
| करण कारक | से / द्वारा | क्रिया का साधन/माध्यम | मैं कलम से लिखता हूँ |
| संप्रदान कारक | को / के लिए | जिसके लिए क्रिया की जाए | माँ बच्चे के लिए खाना बनाती है |
| अपादान कारक | से (अलग होने का भाव) | किसी वस्तु से अलगाव | पेड़ से पत्ता गिरा |
| संबंध कारक | का / के / की | दो वस्तुओं/व्यक्तियों में संबंध | यह राम की किताब है |
| अधिकरण कारक | में / पर | क्रिया का आधार (स्थान/समय) | किताब मेज़ पर रखी है |
| संबोधन कारक | हे! / अरे! / अजी! | किसी को पुकारना/संबोधित करना | हे राम! यहाँ आओ |
3. हर कारक का विस्तृत विवरण व उदाहरण
(क) कर्ता कारक
वाक्य में जो कार्य करता है, उसे कर्ता कारक कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न "ने" है, जो सामान्यतः भूतकाल के सकर्मक वाक्यों में लगता है — जैसे "सीता ने पत्र लिखा।"
(ख) कर्म कारक
जिस वस्तु या व्यक्ति पर क्रिया का प्रभाव पड़े, उसे कर्म कारक कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न "को" है — जैसे "अध्यापक ने छात्र को पढ़ाया।"
(ग) करण कारक
जिस साधन या माध्यम से क्रिया संपन्न हो, उसे करण कारक कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न "से/द्वारा" है — जैसे "वह बस से स्कूल जाता है।"
(घ) संप्रदान कारक
जिसके लिए क्रिया की जाए, उसे संप्रदान कारक कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न "को/के लिए" है — जैसे "पिताजी ने बेटी के लिए उपहार खरीदा।"
(ङ) अपादान कारक
जिससे किसी वस्तु का अलग होना (वियोग) प्रकट हो, उसे अपादान कारक कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न भी "से" है, परंतु यहाँ यह अलगाव का भाव दर्शाता है — जैसे "गंगा हिमालय से निकलती है।"
(च) संबंध कारक
जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम का किसी अन्य संज्ञा से संबंध बताए, उसे संबंध कारक कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न "का/के/की" है — जैसे "यह मोहन का घर है।"
(छ) अधिकरण कारक
क्रिया के आधार (स्थान या समय) को बताने वाले कारक को अधिकरण कारक कहते हैं। इसका विभक्ति चिह्न "में/पर" है — जैसे "बच्चे मैदान में खेल रहे हैं।"
(ज) संबोधन कारक
जब किसी व्यक्ति को पुकारा या संबोधित किया जाए, तो वहाँ संबोधन कारक होता है — जैसे "अरे बच्चों! शोर मत करो।" इसका कोई निश्चित विभक्ति चिह्न नहीं होता, इसे विस्मयादिबोधक चिह्न (!) से पहचाना जाता है।
4. करण व अपादान कारक में अंतर — ट्रिक
छात्रों को सबसे अधिक भ्रम करण और अपादान कारक में होता है, क्योंकि दोनों में विभक्ति चिह्न "से" ही आता है। इसे इस तरह याद रखें:
| आधार | करण कारक | अपादान कारक |
|---|---|---|
| भाव | साधन/माध्यम का बोध | अलग होने (वियोग) का बोध |
| पहचान-प्रश्न | "किसके द्वारा/किस साधन से?" | "किससे अलग हुआ?" |
| उदाहरण | मैं कलम से लिखता हूँ (कलम = साधन) | पेड़ से पत्ता गिरा (अलगाव) |
5. कारक याद रखने की मास्टर ट्रिक
आठों कारकों को क्रम से याद रखने के लिए यह सरल पंक्ति याद रखें:
"कर्ता करे, कर्म को सहे, करण साधन बने,
संप्रदान दे, अपादान अलग करे, संबंध जोड़े,
अधिकरण ठिकाना बताए, संबोधन पुकारे।"
इस क्रम को याद रखते हुए हर कारक के विभक्ति चिह्न (ने-को-से/द्वारा-को/के लिए-से-का/के/की-में/पर-हे) को दोहराते रहें, जल्दी याद हो जाएगा।
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📲 और फ्री टेस्ट के लिए WhatsApp पर रजिस्टर करें8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. कारक किसे कहते हैं?
संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य में क्रिया के साथ उसके संबंध का बोध होता है, उसे कारक कहते हैं।
Q2. कारक के कुल कितने भेद होते हैं?
हिंदी व्याकरण में कारक के आठ भेद होते हैं — कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन कारक।
Q3. विभक्ति किसे कहते हैं?
संज्ञा या सर्वनाम के साथ लगने वाले "ने, को, से, के लिए, का-के-की, में-पर, हे" जैसे चिह्नों को विभक्ति (कारक चिह्न) कहा जाता है।
Q4. करण कारक और अपादान कारक में क्या अंतर है, जबकि दोनों में "से" आता है?
करण कारक में "से" साधन या माध्यम का बोध कराता है, जबकि अपादान कारक में "से" किसी वस्तु के अलग होने का भाव दर्शाता है।
Q5. कर्ता कारक और कर्म कारक में क्या अंतर है?
कर्ता कारक कार्य करने वाले को दर्शाता है (जिसके साथ "ने" लगता है), जबकि कर्म कारक उस वस्तु/व्यक्ति को दर्शाता है जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़ता है (जिसके साथ "को" लगता है)।
Q6. संबोधन कारक की क्या पहचान है?
जब किसी को पुकारा या संबोधित किया जाए, तो वहाँ संबोधन कारक होता है — जैसे "हे राम!" इसका कोई निश्चित विभक्ति चिह्न नहीं होता, बल्कि विस्मयादिबोधक चिह्न (!) प्रयोग होता है।
Q7. सरकारी परीक्षाओं में कारक से कितने प्रश्न पूछे जाते हैं?
SSC, BPSC TRE, राज्य PCS और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के हिंदी विषय में कारक व विभक्ति से जुड़े प्रश्न औसतन 2 से 5 प्रश्न प्रति परीक्षा पूछे जाते हैं।


